UN रिपोर्ट में दाऊद की D-कंपनी को भारत में मौजूद बताया, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति; रिपोर्ट बनाने वाले अधिकारी की फंडिंग पर भी सवाल

दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट को लेकर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। रिपोर्ट में अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के गिरोह डी-कंपनी को भारत में मौजूद अपराधी संगठन बताया गया था। भारत का कहना है कि इस दावे के समर्थन में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई और ऐसी तथ्यात्मक गलतियों से संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति की बैठक में भारत के प्रतिनिधि रघु पुरी ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दाऊद इब्राहिम और उसका गिरोह 1993 के मुंबई बम धमाकों से जुड़े मामले में भारत में वांछित हैं। भारत के मुताबिक, दाऊद 2003 में संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल किए जाने से पहले ही देश छोड़ चुका था।

भारत ने रिपोर्ट में इस अहम तथ्य का उल्लेख नहीं होने पर सवाल उठाए। रघु पुरी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में दाऊद से जुड़ी जानकारी पाकिस्तान की ओर संकेत करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट में अधूरी जानकारी पेश किए जाने से लोगों के सामने गलत तस्वीर बन सकती है।

इस मामले में रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारी बेन सॉल की फंडिंग को लेकर भी विवाद सामने आया है। खबर के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के कामकाज पर नजर रखने वाले संगठन यूएन वॉच ने आरोप लगाया था कि चीन की सरकार ने 2024 में सॉल को 1.5 लाख अमेरिकी डॉलर दिए थे। हालांकि, इस आरोप और इसके संदर्भ को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना इसे स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

भारत ने व्यापक चिंता जताते हुए कहा कि आतंकवाद को मानवाधिकारों की आड़ में सही नहीं ठहराया जा सकता। रघु पुरी के मुताबिक, गलत तथ्यों पर आधारित रिपोर्टें सदस्य देशों के सामने मुश्किलें पैदा करती हैं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

अब इस विवाद के बीच रिपोर्ट की तथ्यात्मक सटीकता और लगाए गए आरोपों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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